सर्च इंजन क्या है? – Search Engine in Hindi

21st century यह वह समय है जब सूचना या इंफॉर्मेशन ही सब कुछ है। एक पल की देरी से मिलने वाली सूचना यहां बेकार हो जाती है। इंफॉर्मेशन की इतनी ज्यादा महत्वता बढ़ती जा रही है कि अब तो इनफॉरमेशन बेस्ड सिस्टम ही बनाए जाने लगे हैं जो हर पल नए मिलने वाले इंफॉर्मेशन के अनुसार काम करते हैं। पर कभी सोचा है यह इनफॉरमेशन कहां से आती है और उससे भी कमाल की बात दुनिया की किसी एक कोने में कुछ होता है और अगले ही पल उसकी पूरी जानकारी दुनिया के दूसरे कोने में पहुंच जाती है। यह सब सुनने में जितना आसान लगता है हकीकत में यह सब इतना आसान है नहीं। इसके पीछे कई सारी तरह की टेक्नोलॉजी, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आपस में मिलकर एक सिस्टम की तरह काम करते हैं।

यह सब संभव हो पाया है इंटरनेट की वजह से। हम जैसा कि हमारे एक आर्टिकल में पहले पढ़ चुके हैं कि इंटरनेट दुनिया भर में मौजूद डिजिटल डिवाइसेज का आपस में जुड़ा हुआ यानी कि इंटरकनेक्टेड नेटवर्क है, जिसकी मदद से किसी भी तरह की इंफॉर्मेशन दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक हाथों हाथ पहुंचा दी जाती है। और यही नहीं इस पूरे इंटरकनेक्टेड नेटवर्क में दुनिया का लगभग सारा ही ज्ञान जो अभी तक मानव सभ्यता ने अर्जित किया है, मौजूद है। फिर वह चाहे मानव सभ्यता की शुरुआत से जुड़े हुए अवशेष या ब्रह्मांड की अथाह दूरी और गहराई, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति, अलग-अलग साम्राज्य और समय काल में होने वाली गतिविधियां यह सब ज्ञान इंटरनेट पर मौजूद है। पहले के समय में किताबे लिखी जाती थी, ताकि आने वाली जनरेशन को अपने पिछले बीते हुए वक्त तक की सारी जानकारी मिल सके, पर अब यह सारी जिम्मेदारी इंटरनेट के ऊपर आ चुकी है, और इंटरनेट इसे बखूबी निभा रहा है। इन सारी बातों से अब शायद आप इंटरनेट की महत्वपूर्णतता समझ पा रहे होंगे।

100 बातों की एक बात कहें तो आज के समय में इंटरनेट इंसानी जीवन की एक आवश्यक जरूरत बन चुका है, और इंटरनेट के साथ यह जिम्मेदारी world-wide-web भी बखूबी निभा रहा है। हमने हमारे पुराने कुछ ब्लोग्स में एचटीएमएल, इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब के बारे में पढ़ा है कि कैसे यह सब अलग-अलग तकनीके एक साथ मिलकर काम कर रही है और हमारे लिए टेक्नोलॉजी को और भी ज्यादा आसान बना रही है। पर आज हम जिस विषय के बारे में पढ़ने वाले हैं वह एक ऐसी एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर है जो कि हमारा काम वाकई में बहुत आसान कर देता है पर हमने कभी उसकी इतनी महत्वता नहीं समझी। और वह एप्लीकेशन और कोई नहीं वह है सर्च इंजन जैसे कि Google Search, Yahoo, bing आदि।

सर्च इंजन क्या है? – Search Engine in Hindi

सर्च इंजन क्या है - Search Engine in Hindi

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सर्च इंजन की परिभाषा क्या है?

सर्च इंजन एक ऐसी एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर है जो कि इंटरनेट पर मौजूद अथाह डेटाबेस में से वह इंफॉर्मेशन ढूंढ के निकालता है, जो हम सर्च इंजन की मदद से ढूंढना चाहते हैं। इसके लिए सर्च इंजन में जा कर के हमें जो भी डाटा या इंफॉर्मेशन चाहिए उसका इनपुट देना होता है। वैसे तो आज के समय में तो वाइस इनपुट भी अवेलेबल है इसलिए मैं टाइप करने की बात तो नहीं कहूंगा पर ये यूजर पर डिपेंड करता है कि वो इनपुट कैसे देना चाहता है।

तो जो भी इंफॉर्मेशन हमें चाहिए होती है हमें सर्च इंजन पर इनपुट देना है, सर्च इंजन उस इनफॉरमेशन को दुनिया भर में मौजूद डेटाबेस में जाकर के सर्च करता है, व जो भी हमारी इनफॉरमेशन से मिलता-जुलता डाटा मौजूद है, उसकी लिंक हमें शो करता है और बस हमें अलग-अलग लिंक पर क्लिक करना है और डाटा को वेरीफाई करना है। जो डाटा हमें सबसे ज्यादा सूटेबल लगता है उसे हमें इस्तेमाल कर सकते हैं।

सर्च इंजन काम कैसे करता है?

सर्च इंजन का काम करने का तरीका बहुत आसान लगता है, लेकिन उसका काम बहुत ही मुश्किल है। हम इसे एक उदाहरण से समझते हैं। आप सब ने बचपन में कभी ना कभी हाइड एंड सीक खेला होगा जिसमें 1 प्लेयर आंखें बंद करके काउंटिंग करता है, और बाकी प्लेयर्स अलग-अलग जगहों पर जाकर के छुप जाते हैं। जब सारे प्लेयर छुप जाते हैं, उसके बाद काउंटिंग करने वाला प्लेयर हर एक छुपे हुए प्लेयर को ढूंढ के निकालता है, इसके लिए वह जितना भी इलाका तय किया गया है उस इलाके की हर एक जगह पर जाकर के खिलाड़ियों को ढूंढेगा।

इंटरनेट पर भी सर्च इंजन बिल्कुल इसी तरह से काम करता है। हर सर्च इंजन की स्क्रीन पर स्क्रीन के बीच में या साइड में एक बार होती है जिसके एंड में मैग्नीफाइड ग्लास का सिम्बोल बना होता है। उस बार में हमें जो भी इंटरनेट से चाहिए, उसे टाइप करना होता है। उसके बाद में या तो उस मैग्नीफाईड ग्लास के निशान पर क्लिक करना है, या फिर इस बार के नीचे सर्च का बटन बना होता है, उस पर क्लिक करना है। इस बटन पर क्लिक करने के बाद में सर्च इंजन हमारी भरी हुई इनफॉरमेशन को अपने हिसाब से वैल्यूट करता है, और फिर उसे कुछ खास तरह के कीवर्ड्स में बदल देता है।

अब अगले स्टेप में सर्च इंजन www ( World wide web) से कनेक्टेड हो करके उन की वर्ड को इंटरनेट पर मौजूद हर तरह के डेटाबेस में जाकर के सर्च करता है, और किसी भी तरह के कीवर्ड से मिलते जुलते डाटा को एक्सेस करता है, वह इंफॉर्मेशन जो हमें चाहिए उससे जुड़े हुए कीवर्ड जिन जिन वेबपेजेस या वेबसाइट पर अवेलेबल है उन सब को लिंक में बदल के उन सबको एक लिस्ट में हमें शो करता है। अब हम इनमें से चाहे जिस लिंक पर जाकर के उस लिंक पर मौजूद डाटा को एक्सेस कर सकते हैं। यहां कुछ बातें ध्यान देने वाली है।

पहली बात, यह जरूरी नहीं है कि उन सब लिंक में जैसा डाटा हमें चाहिए बिल्कुल उसी फॉर्मेट में या उसी तरह का डाटा मौजूद हो। क्योंकि कभी-कभी कुछ लिंक्स में कीवर्ड मैच होने की वजह से वह लिंक लिस्ट में मौजूद होता है, पर उस पर मौजूद डाटा हमारे रिक्वार्मेंट का नहीं होता। यह सर्च इंजन कीवर्ड्स को सर्च करके हमें रिजल्ट देता है, तो अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सर्च इंजन में क्या इनपुट दे रहे हैं, उसका ध्यान रखे। जहां तक हो सके उसे क्लियर और एक्यूरेट यानी कि पॉइंट टू पॉइंट इनपुट देना चाहिए ताकि सर्च इंजन की एक्यूरेसी बढ़ सके और वह वही लिंक में दिखाएं जो हमारे काम के हैं इससे दरअसल हमारी ही मेहनत बचेगी।

दूसरी जान लेने वाली बात यह है कि जब भी किसी भी वेबसाइट को एक्सेस किया जाता है, इससे उस वेबसाइट पर आने वाले विजिटर्स की काउंटिंग बढ़ती जाती है। डिजिटल वर्ल्ड में सबसे ज्यादा यूजर जिस वेबसाइट को एक्सेस करते हैं, उस वेबसाइट को प्रायोरिटी मिलने लगती है और वह रैंकिंग में ऊपर आने लगती है। यहां पर मैं यह समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि जब सर्च इंजन हमें काफी सारे लिंक ढूंढ के दिखाता है तो लिस्ट में मौजूद सबसे पहला लिंक वह है जिसे सबसे ज्यादा बार यूजर्स ने एक्सेस किया है इससे भी मौजूदा डाटा की विश्वसनीयता और भी बढ़ जाती है क्योंकि एक से भले दो, दो से भले चार यानी कि जिस डाटा को हम सर्च कर रहे हैं अगर वह लिस्ट में सबसे पहले नंबर वाली स्क्रीन पर नहीं मौजूद है, तो उसे काफी कम बार यूजर्स द्वारा एक्सेस किया गया है।

एक बात और ध्यान देने लायक है सर्च इंजन एक दो या तीन नहीं बल्कि कीवर्ड के अनुसार मौजूद हर संभव लिंक हमें शो कर देता है। अब वह तो हमें स्क्रीन साइज के अनुसार या सर्च इंजन के पेज पर दी गई लिमिट के अनुसार 10,12 या 20 लिंक नजर आते हैं लेकिन उनके नीचे पेज के एंड में बटन या फिर 1, 2, 3, 4 लिखा होता है जब हम नेक्स्ट बटन पर क्लिक करते हैं या इस 1, 2, 3, 4 जोकि पेज नंबर हैं, पर क्लिक करते हैं तो अगले पेज पर आ जाते हैं जहां पर और भी लिंक मौजूद है तो अब आप सोच सकते हैं कि एक सर्च इंजन किस हद तक जाकर के डाटा सर्च करता है वह यह सब इतनी ज्यादा स्पीड से यहां हमने सर्च इंजन में टाइप किया उधर सर्च इंजन ने एडिट करके हमें दिखा दिया।

हर सर्च इंजन की अपनी कुछ खासियत होती है जैसे कि किस तरह से वह इंफॉर्मेशन को सर्च करता है लिंक जनरेट करता है यह सब उस सर्च इंजन में मौजूद प्रोग्रामिंग की मदद से हो पाता है इसे साधारण भाषा में एल्गोरिथम भी कहते हैं। एल्गोरिथ्म का मतलब एक सिक्वेंस में लिखे हुए रूल्स और रेगुलेशन, जो कि किसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में लिखे जाएंगे और एक प्रोग्राम की तरह यह सारे इंस्ट्रक्शन काम करेंगे।

सर्च इंजन की टर्मिनोलॉजी

crawling indexing and ranking

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सर्च इंजन कुछ बेसिक स्टेप्स में इंफॉर्मेशन को एक्सेस करते हैं वैसे तो पूरी जानकारी कोई भी सर्च इंजन नहीं देता है, क्योंकि वह अपने एल्गोरिथम अपने प्रोसेस को सीक्रेट रखते हैं ताकि दूसरे सर्च इंजन उनकी तकनीक को इस्तेमाल ना कर सकें फिर भी सर्च इंजन के काम करने के तरीके को निम्नलिखित स्टेप्स में बांटा जा सकता है। सबसे पहला स्टेप है crawling दूसरा स्टेप है indexing, तीसरा स्टेप है ranking.

Crawling

इसका सिंपल सा मतलब यह है कि जब भी हम सर्च इंजन में कोई भी की वर्ड देते हैं सर्च इंजन इंटरनेट पर मौजूद सारे डेटाबेस में जाता है उन की वर्ड को सर्च करता है, और उन की वर्ड से जुड़े हुए सारे पेज या वेबसाइट को एक्सेस करता है और अगर उन पेजेस पर भी कोई लिंक दिया हुआ है तो उन लिंक को फॉलो करते हुए आगे के पेजेस पर जाता है। इस तरह से यह प्रोसेस तब तक चलता रहता है जब तक सर्च इंजन उस पेज के आखिर तक ना पहुंच जाए जब सर्च इंजन उस पेज के आखिर में पहुंच जाता है तो वहां पर वह बैक एंड प्रोसेस परफॉर्म करता है। बैक एंड प्रोसेस का मतलब यह है कि जो भी इंफॉर्मेशन मांगी गई थी उससे जुड़ी हुई सारी इनफार्मेशन इस पेज पर मौजूद है। बैक एंड प्रोसेस की मदद से इंफॉर्मेशन को या कंटेंट को सर्च करना आसान हो जाता है।

Indexing

एक बार जब क्रोलिंग और बैक एंड प्रोसेस कंप्लीट हो जाता है तब सर्च इंजन उसे जितने भी लिंक मिले हैं उस सारे लिंक को एक इंडेक्स के रूप में जमाता है ताकि यूजर को सारी इनफार्मेशन सिस्टोमेटिक तरीके से एक इंडेक्स के रूप में शो हो सके। ऐसा इसलिए भी किया जाता है ताकि यूजर को डाटा ढूंढने में आसानी हो सके।

Ranking

रैकिंग के बारे में हम पहले ही बता चुके हैं। किस लिंक को सबसे ज्यादा प्रायोरिटी देनी है और लिस्ट में सबसे ऊपर रखना है यही प्रोसेस रैंकिंग कहलाता है क्योंकि आज के समय में हर सर्च इंजन अपने कस्टमर को सबसे ज्यादा रिलायबल और सबसे ज्यादा एक्यूरेट रिजल्ट सबसे कम समय में देना चाहता है ताकि दूसरे सर्च इंजन के मुकाबले में उसकी स्थिति बढ़ सकें। यह अलग-अलग सर्च इंजन अपने मौजूदा कंटेंट को रैंकिंग कैसे देते हैं इस बारे में कोई भी सर्च इंजन जानकारी नहीं देता है उदाहरण के तौर पर गूगल 200 से भी ज्यादा रूल्स और रेगुलेशंस को फॉलो करता है बात बस यही आ करके खत्म नहीं होती बल्कि अपने सर्च इंजन को बेहतर बनाने के लिए गूगल 1 साल में 500 से 600 बार अपने सर्च इंजन की तकनीक में बदलाव करके उसे पहले से बेहतर बनाता है तो यह तो खाली गूगल का एग्जांपल है अगर हम दूसरे सर्च इंजन जैसे कि याहू, बींग, ओपेरा अगर इनकी बात करें तो यह लिस्ट काफी लंबी हो जाएगी।

सर्च इंजन कितने तरह के होते हैं?

सर्च इंजन

वैसे तो सर्च इंजन की लिस्ट बहुत लंबी है छोटी-छोटी रिक्वार्मेंट बदलने के हिसाब से नए-नए और अलग-अलग सर्च इंजन मार्केट में आते ही रहते हैं पर अगर हम उनके काम करने के तरीके पर ध्यान दें तो इन्हे चार मुख्य भागों में बांटा गया है

क्रोलर बेस्ड सर्च इंजन

क्रोलर बेस्ड सर्च इंजन यह सबसे सिंपल पर सावधान तरीके से काम करने वाला सर्च इंजन है। यहां पर हम किसी भी सर्च इंजन को छोटा या बड़ा नहीं बता रहे हैं, बल्कि हम यह कह रहे हैं कि यह सबसे साधारण तरह से काम करता है। यह जो कि वर्ड दिए गए हैं उन्हें इंटरनेट पर सर्च करता है मौजूदा रिजल्ट्स को इंडेक्स में कन्वर्ट करके यूजर को शो कर देता है इस तरह की सर्च इंजन पर सिर्फ और सिर्फ डाटा के लिंक मिलते हैं जिन पर क्लिक करने से हम उस पेज पर जा सकते हैं।

Web Directory सर्च इंजन

कई बार आपने नोटिस किया होगा कि जब आपने सर्च इंजन में कोई कीवर्ड या इंफॉर्मेशन टाइप की है तो शो होने वाले रिजल्ट कोई लिंक ना हो करके बल्कि कई अलग-अलग लिंक्स के शॉर्टकट होते हैं यानी कि सर्च इंजन पर शो होने वाली किसी भी लिंक पर क्लिक करने पर हम दरअसल एक ऐसे पेज पर चले जाते हैं जहां पर और भी काफी सारे लिंक ही दे रखे होते हैं इसे ही वेब डायरेक्टरी कहते हैं यह बिल्कुल टेलिफोन डायरेक्टरी जैसी ही होती है जिस तरह से टेलीफोन डायरेक्टरी में सब के नंबर होते हैं उसी तरह वेब डायरेक्टरी में हमारे कीवर्ड्स के अनुसार मौजूद वेबसाइट या वेबपेजेस का कलेक्शन होता है आप लोगों में से ज्यादातर जनों ने क्योरा का नाम सुना होगा यह एक वेब डायरेक्टरी है।

हाइब्रिड सर्च इंजन

ऐसे सर्च इंजन दरअसल वेब पेजेस के लिंक और वेब पेजेस के कलेक्शन के लिंक को एक साथ अपने रिजल्ट में शो करते हैं, यानी कि जो रिजल्ट हमें शो होंगे उनमें से कोई लिंक तो डायरेक्ट होगा और कोई लिंक हमारे कीवर्ड से जुड़े हुए लिंक्स का एक कलेक्शन होगा। सिंपल भाषा में बात करें तो हाइब्रिड सर्च इंजन क्रॉलर बेस्ड सर्च इंजन और वेब डायरेक्टरी का कॉन्बिनेशन होता है। गूगल हाइब्रिड सर्च इंजन के कंसेप्ट पर काम करता है।

मेटा सर्च इंजन

मेटा सर्च इंजन दरअसल एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोई भी कीवर्ड देने के बाद में यह सर्च इंजन खुद दूसरे सर्च इंजन पर इन कीवर्ड को फॉरवर्ड कर देता है अब वह सारे सर्च इंजन उसकी ओर से जुड़े हुए सारे तरह के डाटा को एक्सेस करते हैं उनके लिंक तैयार करते हैं और यह सारे लिंक हमारा मेटा सर्च इंजन हमें एक लिस्ट बनाकर के शो कर देता है।

ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई भी सर्च इंजन ऊपर दी गई किसी एक ही तकनीक का इस्तेमाल करे। बल्कि कई सर्च इंजन इन सब तकनीको का एक साथ भी इस्तेमाल करते हैं, और जरुरत होने पर अलग अलग तकनीको को मिला कर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

वेब ब्राउज़र का इतिहास

वेब ब्राउज़र

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जैसा कि हम पहले पढ़ चुके हैं 1960 से इंटरनेट चालू हो चुका था और 1990 तक आते-आते वर्ल्ड वाइड वेब का भी आविष्कार हो चुका था। वेब ब्राउजर्स भी लगभग इसी समय में आए थे। दरअसल टीम बर्नस ली के प्रयासों की वजह से ही वेब ब्राउज़र अस्तित्व में आ पाए। आप में से जो लोग टीम बर्नर्स ली को नहीं जानते हैं उनके लिए हम बता दें कि टीम बर्नर्स ली ने ही वर्ल्ड वाइड वेब का आविष्कार किया था। इसके अलावा एचटीएमएल का आविष्कार भी उन्होंने ही किया था। सर्च इंजन का क्रेडिट पूरी तरह से तो उन्हें नहीं जाता है लेकिन इसकी शुरुआत उन्होंने ही करी थी। शुरुआती दिनों में सर्च इंजन जैसी कोई टेक्निक नहीं थी।

इंटरनेट पर जो भी डाटा सर्च करना हो वह यूजर को मैनुअली ही सर्च करना होता था। यानी की इंटरनेट से जितने भी सर्वर कनेक्ट होते थे, यूजर को खुद हर सर्वर से जुड़ कर सारा डाटा सर्च करना पड़ता था। यह एक बहुत ही ज्यादा टाईम कंंज्युमिंग प्रोसेस था। और उस समय इंटरनेट को सभी इस्तेमाल नहीं करते थे, बल्कि सिर्फ रिसर्च या एजुकेशन इंस्टिट्यूट अपने काम के लिए ही इस्तेमाल करते थे तो इंटरनेट पर मौजूद डाटा कम था लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेट पर सर्वस की कनेक्टिविटी बढ़ती गई ऐसे प्रोग्राम की जरूरत महसूस की गई जिनमें यूजर को कोई भी ज्यादा मैनुअल सर्च ना करना पड़े, बल्कि खाली कीवर्ड देने से ही इंटरनेट पर मौजूद सारा डाटा इस एप्लीकेशन में एक ही बार में सर्च हो जाए।

सर्च इंजन का आविष्कार

सर्च इंजन का आविष्कार

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क्या आप सोच सकते हैं सबसे पहला सर्च इंजन किसने बनाया होगा आप सभी बड़े बड़े कंप्यूटर वैज्ञानिकों के नाम सोच रहे होंगे तो हकीकत में सबसे पहला सर्च इंजन एक स्कूल प्रोजेक्ट था जो कि 1990 में बनाया था और इसे बनाने वाले थे Alan Emtage, जोकि McGill University के विद्यार्थी थे और उनका बनाया हुआ सर्च इंजन केवल एक शुरुआत भर थी उन्होंने उसे आविष्कार करने के लिए नहीं बनाया बल्कि अपने काम को आसान बनाने के लिए बनाया था। जल्दी यह कंसेप्ट इतना प्रसिद्ध हुआ कि कई आर्गेनाइजेशन अपने खुद के सर्च इंजन बनाने के लिए काम में जुट गई इनमें से कुछ प्रमुख सर्च इंजन नीचे दिए हुए हैं:

1990 में Archie सर्च इंजन बनाया गया।

1994 में याहू सर्च इंजन की शुरुआत हुई और यह आज के समय में भी जितना प्रसिद्ध है हमें इसके बारे में ज्यादा बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

1994 में ही एक सर्च इंजन लाइकोस भी अस्तित्व में आया।

इसी समय यानी कि 1994 में ही एक और सर्च इंजन बहुत प्रसिद्ध हो रहा था उसका नाम था इंफोसिक।

1995 में एल्टा विस्टा नाम से एक नया सर्च इंजन आया।

1996 में इंकटॉमी नाम का सर्च इंजन जनता के लिए जारी किया गया।

1996 में आस्क डॉट कॉम नाम का सर्च इंजन बनाया गया।

गूगल सबका पसंदीदा सर्च इंजन इसकी शुरुआत 1995 में हो गई थी 1996-97 तक अस्तित्व में आ गया।

सर्च इंजन तो कई सारे थे, और आज भी हैं, पर हमने कुछ बहुत ज्यादा विख्यात हुए सर्च इंजन के बारे में ही बताया हैं।

इतने सारे सर्च इंजन इसलिए होते हैं क्योंकि हर सर्च इंजन को अलग-अलग जरूरत के हिसाब से बनाया जाता है जैसे कि कोई सर्च इंजन सिर्फ और सिर्फ फाइलों को ही सर्च करता है कोई सर्च इंजन सिर्फ इमेजेस या वीडियोस को सर्च करता है कोई सर्च इंजन ऑडियो फाइल्स को सर्च करता है हालांकि मौजूदा समय के सर्च इंजन यह सारे काम खुद ही कर लेते हैं पर फिर भी आज भी कई ऐसे अलग-अलग सर्च इंजन मौजूद हैं जिनमें ढूंढे जा सकने वाले डाटा लिमिटेड क्वांटिटी के होते हैं इसलिए क्योंकि अगर किसी सर्च इंजन की कैपेसिटी तय कर दी जाए या लिमिट तय कर दी जाए तो उससे उसके काम करने की स्पीड कहीं गुना बढ़ जाएगी उदाहरण के तौर पर अगर कोई सर्च इंजन सिर्फ टेक्स्ट फाइल सर्च करने के लिए बनाया गया है तो वह कीवर्ड्स को सर्च करते वक्त वीडियोस ऑडियोज इमेजेस या अन्य किसी भी तरह की फाईलों को छुएगा भी नहीं सिर्फ और सिर्फ टेक्स्ट फाइलों को ही सर्च करेगा इससे यूजर का काम इतना आसान हो जाता है कि उसे कुछ सिलेक्टेड लिंक ही रिजल्ट के रूप में शो होते हैं।

सर्च इंजन का इस्तेमाल जैसा कि हम शुरुआत में कह चुके हैं आज के समय में इंटरनेट और इंफॉर्मेशन ही सब कुछ है तो सर्च इंजन की महत्वता और भी ज्यादा बढ़ जाती है पर सर्च इंजन कस्टमर की अलग-अलग रिक्वायरमेंट के हिसाब से भी बनाए जाते हैं जैसे कि आज के समय में तो शॉपिंग के लिए अलग-अलग सर्च इंजन मौजूद हैं एंटरटेनमेंट के लिए अलग सर्च इंजन मौजूद है एजुकेशन एंड रिसर्च के लिए अलग सर्च इंजन मौजूद है जनरल यूज़ के लिए अलग सर्च इंजन मौजूद है यानी कि सर्च इंजन का इस्तेमाल तो हर जगह हो रहा है, और हर पल इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है

हम आशा करते कि आपको यह जानकारी पसंद आएगी। सर्च इंजन क्या है इस बारे में किसी भी तरह की और जानकारी या सवाल के जवाबो के लिए हमें कमेंट में बताएं।

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