नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है? – Network Topology in Hindi

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है ? इसका अर्थ समझने के लिए पहले हमें ये जानना होगा की टोपोलॉजी किसे कहते है। तो बिना समय वर्थ करे जानते है टोपोलॉजी किसे कहते है।

टोपोलॉजी किसी भी नेटवर्क का लेआउट होता है। नेटवर्क में जितने भी नोड होते है वो कैसे एक दूसरे से जुड़े होते है व किस तरह से एक दूसरे से कम्यूनिकेट करते है उसे topology दवारा निर्धारित किया जाता है। यह दो प्रकार की होती है।

  1. फिजिकल टोपोलॉजी: फिजिकल टोपोलॉजी में computer और device को फिजिकल रूप में कैसे जोडा जाता है इसमें उसका वर्णन  है।
  2. लॉजिकल टोपोलॉजी: किसी भी नेटवर्क में डाटा कैसे ट्रांसफर होता है इसमें उसका वर्णन है।

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या होती है?

किसी कंप्यूटर नेटवर्क में कम्पूटरो को आपस में जुड़ने के तरीके को Network टोपोलॉजी कहते है। सरल सब्दो में आप कह सकते है की नेटवर्क टोपोलॉजी कंप्यूटर नेटवर्क के विभिन प्रकार के elements (Link, Nodes) की सरचना है।

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नेटवर्क टोपोलॉजी के प्रकार

नेटवर्क टोपोलॉजी के छह प्रमुख प्रकार है। जिसकी मदद से आप अपना कंप्यूटर नेटवर्क बना सकते हो।

1. Bus टोपोलॉजी

बस टोपोलॉजी में नेटवर्क की सारी डिवाइस एक केबल से जुडी होती है मतलब सभी computers को एक हे केबल से क्रम में जोड़ा होता है। उसी केबल से सारी डिवाइस आपस में information share करते है। यह एक थिक coaxial केबल है जो एक नेटवर्क में अधिक device ऐड करने के लिए डेज़ी चैन स्कीम का use करती है। इसमें सारे डिवाइस एक दूसरे से जुड़े होते है और पहले device और आखिरी device terminator से जुड़े होते है।

बस टोपोलॉजी के फायदे

  • Small नेटवर्क के लिए अच्छी है।
  • यह समझने में आसान है।
  • यह सस्ती टोपोलॉजी है।
  • इस टोपोलॉजी  में कम केबल का प्रयोग होता है।

बस टोपोलॉजी से नुकसान 

  • इसमें डाटा शेयर करने की  गति कम होती है।
  • मुख्य केबल अगर टूट जाये तो पूरा नेटवर्क बंद हो जाता है।
  • इसकी length limited होती है।

bus topology

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2. Star टोपोलॉजी

इसमें सारे डिवाइस को एक केबल के माध्यम से एक central डिवाइस से कनेक्ट किया जाता है जिसे Hub या switch कहते है। उपकरणों को ऑप्टिकल फाइबर केबल के माध्यम से स्विच से जोड़ते है। यह इनफार्मेशन ट्रांसफर करने के लिए सबसे कॉस्ट-effective तरीका है। यदि इसमें कोई डिवाइस ख़राब हो जाता है तो अन्य कंप्यूटर प्रभावित नहीं होते है।

स्टार टोपोलॉजी के फायदे 

  • इसको इनस्टॉल करना काफी आसान है।
  • नेटवर्क में नया वर्कस्टेशन जोड़ना आसान है।
  • अगर नेटवर्क में कभी दिक्कत आजाये तब फौल्टी device ढूंढ़ना आसान है।
  • अगर नेटवर्क में कनेक्टेड कोई device ख़राब हो जाये तो पूरा नेटवर्क क्रैश नहीं होता है।

स्टार टोपोलॉजी के नुकसान

  • अगर नेटवर्क का सेंट्रल hub ख़राब हो जाता है तो पूरा नेटवर्क हो जाता है।
  • इसमें ज़्यादा केबल की जरुरत पड़ती है।

स्टार टोपोलॉजी

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3. Ring टोपोलॉजी

रिंग टोपोलॉजी में सारे डिवाइस circular स्ट्रक्चर में एक दूसरे से जुड़े होते है। डाटा का ट्रांसफर सिर्फ clockwise और एंटी clockwise होता है। यह device एक दूसरे पे depend करते है। इसमें कोई host डिवाइस नहीं होता है। सारे डिवाइस repeater की तरह काम करते है।

रिंग टोपोलॉजी के फायदे 

  • नेटवर्क में traffic की मात्रा बढ़ जाये तो ये आसानी से संभाल लेता है।
  • नेटवर्क में अच्छी स्पीड प्रदान करता है।
  • इस टोपोलॉजी की लागत कम होती है।

रिंग टोपोलॉजी के नुकसान

  • एक ख़राब डिवाइस सरे नेटवर्क को क्रैश कर सकता है।
  • अगर किसी डिवाइस को कनेक्ट या disconnect करना हो तब पूरा डिवाइस बंद करना पड़ता है।
  • इसमें ट्रबलशूटिंग करना मुश्किल होता है।

ring topology

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4. Mesh टोपोलॉजी

मेष टेक्नोलॉजी में नेटवर्क की सारे डिवाइस आपस में एक दूसरे से जुड़े होते है। इस टोपोलॉजी में डाटा अपनी डेस्टिनेशन तक कोई भी पाथ लेकर पहुंच सकता है। इसका mainly use वहा किया जाता है जहा पर नेटवर्क ब्रेक होता रहता है। इसका स्ट्रक्चर बहुत complex है।

मेष टोपोलॉजी के फायदे 

  • Faulty डिवाइस को आसानी से detect कर सकते है।
  • इसमें डाटा की reliability ज्यादा होती है।
  • इस टोपोलॉजी में सिक्योरिटी ज्यादा होती है।
  • इस टोपोलॉजी को manage करना आसान है।

मेष टोपोलॉजी के नुकसान

  • मेष टोपोलॉजी काफी महंगा होता है।
  • मेष टोपोलॉजी को इम्प्लीमेंट करने के लिए बहुत सारी केबल्स और NIC कार्ड्स की आवश्कता पढ़ती है।

मेष टोपोलॉजी

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5. Tree टोपोलॉजी

ट्री टोपोलॉजी स्टार टोपोलॉजी और बस टोपोलॉजी दोनों के मिक्सचर से बना होता है। इसमें इन दोनों के लक्षण होते है। इसमें स्टार टोपोलॉजी के जैसे एक होस्ट कंप्यूटर होता है और सरे डिवाइस एक क्रम में बस टोपोलॉजी कि तरह जुड़े हुए होते है। इस नेटवर्क में ट्विस्टेड पेअर केबल का प्रयोग किया जाता है।

ट्री टोपोलॉजी के फायदे 

  • आसानी से नेटवर्क बढ़ा सकते है।
  • इसमें एक ही Hub पर मल्टीप्ल डिवाइस जोड़ने की अनुमति होती है।
  • इसमें डिवाइस का पॉइंट to पॉइंट कनेक्शन होता है।

ट्री टोपोलॉजी के नुकसान

  • इसको install करना बहुत ही मुश्किल है।
  • इसमें जयदा बड़ी केबल की आवश्कता होती है।
  • इसको manage करना बहुत ही कठिन होता है।

Tree topology

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6. Hybrid टोपोलॉजी

यह टोपोलॉजी अलग अलग प्रकार की टोपोलॉजी को मिलाकर बनती है। यह टोपोलॉजी कॉर्पोरेट office में काम आती है। हाइब्रिड टोपोलॉजी हम अपने हिसाब से बना सकते है।

हाइब्रिड टोपोलॉजी के फायदे 

  • यह बड़े ऑफिस में प्रयोग में ली जाती है।
  • यह ज्यादा ट्रैफिक को आसानी से हैंडल कर सकता है।
  • हाइब्रिड टेक्नोलॉजी से बना नेटवर्क कभी भी पूरी तरह से क्रैश नहीं होता।

हाइब्रिड टोपोलॉजी के नुकसान

  • यह काफी महँगा होता है।
  • यह नेटवर्क थोड़ा काम्प्लेक्स होता है व इसको समझना थोड़ा कठिन होता है।
  • इसको इनस्टॉल करना बहुत मुश्किल है।

हाइब्रिड टोपोलॉजी

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निष्कर्ष

इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए धन्यवाद, आशा करता हु ये आर्टिकल पढ़ने के बाद आपको ज्ञात हो गया होगा की टोपोलॉजी किसे कहते है, नेटवर्क टोपोलॉजी क्या होती है व ये कितने प्रकार की होती है। अगर आपको इस आर्टिकल से related कोई भी सवाल हो तव हमे कमेंट section में जरूर बताये।

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