Difference between LCD and LED in Hindi – LCD और LED में अंतर

एलसीडी और एलईडी दोनों ही फ्लैट डिस्प्ले के प्रकार होते हैं जो कि आज के समय में हर डिस्प्ले डिवाइस में लगाए जाते हैं जैसे के टीवी, कंप्यूटर्स, लैपटॉप् और बाकी सभी तरह के डिस्प्ले डिवाइसेज।

एलसीडी की फुल फॉर्म होती है, लिक्विड क्रिस्टल डिस्पले

एलईडी की फुल फॉर्म होती है लाइट एमिटिंग डायोड

आज हम एलसीडी और एलईडी दोनों के बीच में क्या अंतर है यह जानेंगे।

Difference between LCD and LED in Hindi

बनावट

एलसीडी:

एलसीडी और एलईडी दोनों ही फ्लैट पैनल डिस्प्ले सिस्टम है यानी कि दोनों ही देखने में ऐसी लगती है जैसे दीवार पर कोई तस्वीर लगा रखी हो।

एलसीडी डिस्पले कई तरह की sheets का एक अरेंजमेंट होता है जैसे कि polarization filter sheet (vertical and horizontal both), steel plate, reflector sheet, Twisted crystal sheet, Transistor sheet. इसका खुद का कोई लाइट जनरेशन नहीं होने से ये अलग से लाइट सोर्स इस्तेमाल करती है।

एलसीडी बनावट

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एलईडी:

एलईडी डिस्प्ले, लाइट एमिटिंग डायोडस से बना हुआ एक फ्लैट पैनल होता है। ये डायोड खुद लाइट पैदा करते है।

एलईडी डिस्प्ले, एलसीडी डिस्पले के मुकाबले और भी ज्यादा पतले (Compaq) होते हैं।

एलईडी बनावट

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कार्यप्रणाली

एलसीडी:

एलसीडी में लाइट जनरेट करने के लिए कैथोड या फ्लोरोसेंट ट्यूब (जैसे कि ट्यूबलाइट या एलईडी पैनल) का इस्तेमाल किया जाता है और उस लाइट को लिक्विड क्रिस्टल्स और पोलेराईज्ड शीट्स के बीच में से गुजारा जाता है। लिक्विड क्रिस्टल्स खास तरह के मैटेरियल के बने होते हैं जो कि नाही लिक्विड होते हैं और ना ही सॉलिड। दरअसल यह क्रिस्टल्स प्लाज्मा की तरह होते हैं। इन क्रिस्टल का अरेंजमेंट ट्रांजिस्टर की मदद से बदला जा सकता है इस वजह से ट्रांजिस्टर से इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई करने पर क्रिस्टल स्ट्रैट (वर्टीकल ↑) या आरबीटरी (अनिश्चित आकार ↑→) अरेंजमेंट हासिल कर लेते हैं जिस वजह से लाइट आगे जा पाती है या रुक जाती है और इसी का इस्तेमाल करके लाइट के रास्ते में ब्लॉकेज पैदा किए जाते हैं। जब यह क्रिस्टल्स स्ट्रैट हो जाते हैं तब लाइट डिस्प्ले स्क्रीन तक नहीं पहुंच पाती है और स्क्रीन पर अंधेरा रहता है जबकि इलेक्ट्रिसिटी हटा देने पर यह क्रिस्टल्स अपनी असली अरेंजमेंट में वापस आ जाते हैं और लाइट को 90 डिग्री एंगल पर मोड़ देते हैं उसी कंडीशन में लाइट डिस्प्ले स्क्रीन तक पहुंच जाती है और हमें डिस्प्ले पर लाइट्स नजर आती है।

एलसीडी कार्यप्रणाली

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एलईडी:

एलईडी दरअसल एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं, जिसमें दो अलग-अलग चार्ज (नेगेटिव और पॉजिटिव चार्ज) वाले मटेरियल की प्लेटो को आपस में जोड़ दिया जाता है और जब इस जोड़ में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई किया जाता है तब नेगेटिव चार्ज पॉजिटिव चार्ज की तरफ आकर्षित होता है। नेगेटिव और पॉजिटिव चार्ज आपस में कंबाइंड हो जाते हैं। इस प्रोसेस में लाइट पेदा होती है, वही लाइट इस डिवाइस से बाहर की तरफ चली जाती है इसलिए इसे लाइट एमिटिंग डायोड कहते हैं। इलेक्ट्रिसिटी की क्षमता को कम या ज्यादा करके डायोड से निकलने वाली रोशनी की क्षमता को घटाया बढ़ाया जा सकता है यानी कि जितनी ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी उतनी ज्यादा लाइट।

ब्राइटनेस और कंट्रास्ट (CLEARITY)

एलसीडी:

इसमें लाइट्स डिफरेंट शीट्स के बीच में से ट्रैवल करती है और डिस्प्ले तक पहुंचती है। यानि की लाइट के रास्ते में कई रुकावटे आती है जिस वजह से एलसीडी की ब्राइटनेस कम हो जाती है। इसकी CLEARITY एलईडी से कम होती है।

एलईडी:

एलईडी में डायोड्स सीधा लाइट को जनरेट करते हैं इसीलिए इसमें डिस्प्ले की ब्राइटनेस ज्यादा अच्छी होती है।एलईडी कि ब्राइटनेस एलसीडी से ज्यादा होती है।

हालांकि एलसीडी और एलईडी की ब्राइटनेस हम हमारे हिसाब से कम ज्यादा कर सकते हैं, लेकिन यहां पर ब्राइटनेस का मतलब पिक्चर क्वालिटी से है। एलईडी की ब्राइटनेस पिक्चर क्वालिटी हमे बिल्कुल वास्तविकता का अनुभव देती है जबकि एलसीडी में ब्राइटनेस आर्टिफिशियल लगती है यानी कि एलईडी में ऐसा लगता है जैसे हम किसी सीन को वास्तविकता में वही मौजूद रहकर देख रहे हैं जबकि एलसीडी में यह अंतर आसानी से पता लग जाता है।

पावर कंजप्शन

एलसीडी:

एलसीडी का पावर कंजप्शन ज्यादा होता है यानी की यह ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी यूज करती है।

एलईडी:

डायोड बेस्ट सिस्टम होने के कारण एलईडी का पावर कंजप्शन एलसीडी के मुकाबले काफी कम होता है।

रेज्योलूशन (पिक्सल डेंसिटी) और कलर

एलसीडी:

एलसीडी डिस्प्ले का रेजोल्यूशन साधारण या पुराने डिस्प्ले डिवाइसेज (सीआरटी, जैसे कि पुराने टीवी) के मुकाबले बेहतर होता है।

एलईडी:

एलईडी डिस्प्ले का रेजोल्यूशन एलसीडी के मुकाबले कई गुना बेहतर होता है।

एलईडी में कलर कॉम्बिनेशन एलसीडी से ज्यादा होते हे।

साधारण शब्दों में कहें तो एलईडी डिस्प्ले आपके स्क्रीन के डिस्प्ले एक्सपीरियंस को कई गुना बेहतर बना देता है।

स्ट्रक्चर

एलसीडी:

एलसीडी डिस्पले डिवाइसेज साधारण डिस्प्लेस के मुकाबले पतली होती है। साथ ही वजन में भी कम होती है।

एलईडी:

चुंकि एलईडी और एलसीडी दोनों ही डिस्प्ले डिवाइसेज हैं इसलिए किस साइज का डिस्प्ले लिया जाता है उसके हिसाब से वजन कम ज्यादा होता है। लेकिन एक ही साइज के एलसीडी और एलईडी डिस्प्ले में एलईडी वजन में हल्का होगा।

कीमत

एलसीडी:

कीमत के हिसाब से एलसीडी साधारण डिस्प्ले से थोड़ा सा महंगा लेकिन एलईडी डिस्प्ले के मुकाबले सस्ता होता है।

एलईडी:

एक ही साइज के एलईडी और एलसीडी में एलईडी ज्यादा महंगा होगा।

एसेसरीज़ (ट्रांजिस्टर)

एलसीडी:

हालांकि एलसीडी और एलईडी दोनों ही डिस्प्ले में पिक्सल्स सबसे अहम भूमिका निभाते हैं लेकिन एलसीडी में ट्रांजिस्टर की रिक्वायरमेंट बहुत ज्यादा पड़ जाती है जबकि एलईडी में ट्रांजिस्टर कम इस्तेमाल होते हैं।

उदाहरण के तौर पर अगर एक एलसीडी डिस्प्ले में 2000 पिक्सेल है, उसमें लगने वाले ट्रांजिस्टर की संख्या 6000 होगी।

एलईडी:

एलईडी में अगर 2000 पिक्सल हैं तो ट्रांजिस्टर भी 2000 ही होंगे।

ड्यूरेबिलिटी (टिकाऊ)

एलसीडी:

एलसीडी थोड़ा नाजुक स्ट्रक्चर है, इसके खराब होने या टूटने के चांसेज़ ज्यादा होते है। रिपेयरिंग चार्जेज भी ज्यादा होते है।

एलईडी:

एलईडी ज्यादा टिकाऊ है। आसानी से टूटता या ख़राब नहीं होता है। रिपेयरिंग चार्जेज भी एलसीडी के मुकाबले कम होते है।

मल्टीपर्पज़

एलसीडी:

एक बात और ध्यान देने वाली है कि अगर हम डिस्प्ले डिवाइस से हटकर सिर्फ टेक्नोलॉजी की बात करें जैसे के एलईडी बल्ब तो एलईडी बल्ब बनाना संभव है, जबकि एलसीडी बल्ब बना पाना लगभग नामुमकिन। क्योंकि एलसीडी की टेक्नोलॉजी को बल्ब जैसे स्ट्रक्चर में कन्वर्ट करना एक बहुत ही मुश्किल और बहुत ही महंगा कार्य है इसीलिए एलसीडी तकनीक सिर्फ और सिर्फ डिस्प्ले तक ही सिमटकर रह गया है।

एलईडी:

जबकि एलईडी डायोड बेस्ड सिस्टम है और डायोड हर तरह के साइज और आकार में बनाए जा सकते हैं इसीलिए एलईडी टेक्नोलॉजी आज हर फील्ड में अपने पांव पसार रही है।

ज्यादा बेहतर कौन?

एलसीडी:

एलसीडी में लाइट सोर्स अलग होता है और उससे पैदा हुई रोशनी को अलग-अलग एंगल्स पर मोड़ कर पूरी स्क्रीन पर फैला दिया जाता है।

एलईडी:

जबकि एलईडी में पूरी स्क्रीन के पीछे डायोड लगे होते हैं और यह खुद आवश्यकता अनुसार अलग-अलग तरह की रोशनी पैदा करते हैं। इसीलिए एलईडी की क्वालिटी बहुत ही ज्यादा अच्छी होती है और इसी कारण की वजह से एलईडी बल्ब भी बहुत ज्यादा रोशनी पैदा करते हैं वह भी बहुत ही कम एनर्जी में यानी कि बहुत कम इलेक्ट्रिसिटी में। यानि की एलईडी ज्यादा बेहतर है।

निष्कर्ष

एलईडी की कार्यप्रणाली बहुत ही सिंपल है और बहुत ज्यादा इफेक्टिव भी इसीलिए एलईडी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। एलईडी डिस्प्ले थोड़े से महंगे होते हैं क्योंकि एलईडी में नए-नए टेक्नोलॉजिकल अपडेट्स आ रहे हैं जैसे कि OLED, AMOLED.

साथ ही एलसीडी डिस्प्ले की कार्यप्रणाली फिक्स होती है यानी कि उसमें ज्यादा बदलाव नहीं किए जा सकते इस वजह से एलसीडी में ज्यादा नए वेरिएशन वाले मॉडल्स नहीं आते हैं जबकि दूसरी तरफ एलईडी में कॉम्पैक सिस्टम होने की वजह से और डायोड बेस्ड सिस्टम होने की वजह से हर रोज नए नए तरह के बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसीलिए एलईडी एक ज्यादा बेहतर ऑप्शन है।

उम्मीद करते है कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। किसी भी तरह की क्वेरी के लिए हमे कमेंट बॉक्स में लिख कर बताये।

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