क्या 29 April 2020 को होगा दुनिया का विनाश?

पिछले कुछ समय से एक बात बहुत ही ज्यादा तेजी से फैल रही है कि 29 अप्रैल 2020 को पृथ्वी का खात्मा हो जाएगा क्योंकि हिमालय पर्वत की साइज का एक बड़ा सा एस्ट्रॉयड पृथ्वी से टकराने वाला है। “1998 O R2” नाम के इस एस्ट्रॉयड का आकार लगभग 4 किलोमीटर व्यास (डायमीटर) का है। इस आकार से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह माउंट एवरेस्ट की साइज का लगभग आधा हो सकता हैं।

29 अप्रैल तक इसके धरती को पार करने की संभावना है पर उस समय यह धरती से 3.9 मिलीयन माइल्स दूर होगा। यह अपने आप में काफी पर्याप्त दूरी है। नासा के द्वारा इसे close approach (लगभग पास, इतनी दूरी जिससे कोई नुकसान ना हो) की दूरी कहा गया है। यहां एक बात साफ तौर पर कही जा सकती है कि इस एस्ट्रॉयड और धरती के बीच में टक्कर का कोई चांस ही नहीं है, क्योंकि यह पृथ्वी से 3.9 मिलीयन माइल्स की दूरी से निकलेगा जो कि पृथ्वी और चांद के बीच की दूरी का लगभग 16 गुना है। नासा के द्वारा इसे एक संभावित खतरे के रूप में देखा जा रहा है, इसलिए नहीं कि यह धरती को खतरे में डाल सकता है पर इसलिए क्योंकि यह इस एजेंसी की क्लासिफिकेशन स्कीम के सारे क्राइटेरिया को पूरा करता है। नासा के अनुसार कोई भी एस्ट्रॉयड संभावित खतरा बन सकता है, अगर उसका ऑर्बिट पृथ्वी के ऑर्बिट को 4.6 मिलीयन माइल्स या 0.05 एस्टॉनोमिकल यूनिट से कम दूरी से इंटरसेक्ट करता है। सूरज से पृथ्वी के बीच की दूरी 1 एस्टॉनोमिकल यूनिट कहलाती है।

इस एस्ट्रॉयड के धरती से टकराने के क्या चांसेज हैं?

क्या 29 April 2020 को होगा दुनिया का विनाश

एस्ट्रॉयड 1998 O R2 आकार में 4 किलोमीटर से भी ज्यादा बड़ा है। कोई भी एस्ट्रॉयड जिसका डायमीटर 1 किलोमीटर से ज्यादा हो उसकी तुलना किसी भी मानव निर्मित हथियार से नहीं की जा सकती है। अगर यह धरती से टकराता है, तो जरूरी नहीं कि यह धरती पर सभी जीवित प्राणियों को खत्म कर दें। पर टक्कर होने के बाद के जो परिणाम होंगे वह हिरोशिमा में हुए नुकसान से 10 गुना ज्यादा भयावह होंगे।

अगर यह एस्ट्रॉयड धरती की सतह पर टकराता है, तो उस टक्कर से इतनी धूल और मलबा हवा में उड़ेगा जोकि सूरज से आने वाली रोशनी को ब्लॉक कर देगा। सूरज से आने वाली रोशनी धरती तक नहीं पहुंचेगी तो धरती का तापमान बहुत तेजी से नीचे गिरने लग जाएगा और धरती आइस एज (Ice Age) या हिम युग वाली परिस्थिति में आ जाएगी। इससे धरती पर मौजूद सभी जीवित प्रजाति का अस्तित्व समाप्ति के कगार पर आ जाएगा।

अगर यह एस्ट्रॉयड पानी में गिरता है, तो इससे असंख्य तूफानी समुद्री धाराएं उठेंगी, जिनकी ऊंचाई सेंकड़ों फीट से भी ज्यादा होगी। जिसकी क्षमता सभी समुद्री किनारों को अपने में समाहित करने के लिए काफी होगी। यह एक ऐसी सुनामी को जन्म देगा, जो धरती के बहुत बड़े भूभाग को जल से ढक देगी।

छोटे एस्ट्रॉयड, जिन्हें Comets या Meteoroids कहां जाता है, यह आए दिन धरती की सुरक्षा प्रणाली को तोड़ते रहते हैं, और धरती के चारों तरफ मौजूद वायुमंडल के घर्षण के कारण खुद ही नष्ट हो जाते हैं। पर इतने बड़े एस्ट्रोयड जो धरती पर जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं, बहुत ही ज्यादा rare होते हैं।

अभी तक जितनी भी एस्ट्रॉयड टकराने की घटनाएं हुई है, उनको स्टडी करने के बाद यह पता लगा है 1 किलोमीटर डायमीटर से ज्यादा बड़े एस्ट्रॉयड हर औसतन 500,000 सालों में धरती से टकराते हैं, पर 5 किलोमीटर डायमीटर से बड़े आकार वाले एस्ट्रॉयड लगभग 20 मिलियन साल में एक बार आते हैं।

हालांकि यह सत्य है पर इसकी गुंजाइश बहुत ही ज्यादा कम है के किसी एस्ट्रॉयड के टकराने से सभी जीवित प्राणियों का नाश हो जाएगा।

Evolution and Technology नाम के जनरल में पब्लिश होने वाली एक स्टडी के अनुसार अब तक लगभग 5 कंफर्म Mass Extinction (बहुत ज्यादा बड़े स्तर पर खात्मा) हुए हैं, जिनमें से एक सीधे-सीधे उस एस्ट्रॉयड की टक्कर से जुड़ा हुआ है, जो आज से 65 मिलियन साल पहले हुआ था, जिसे KT extinction भी कहते हैं, जिसने धरती पर से डायनासोर जैसे विशाल प्राणियों का खात्मा कर दिया था। यह एस्ट्रॉयड आकार में लगभग 10 किलोमीटर डायमीटर का था, जो धरती पर Yucatan Peninsula नमक जगह पर टकराया था।

NASA

एक एस्ट्रॉयड से होने वाले खतरों को ध्यान में रखते हुए नासा (NASA : National Aeronautics and Space Administration) और यूरोपियन स्पेस एजेंसी (European Space Agency),अंतरिक्ष में लगातार नजर रखे हुए हैं ताकि धरती की तरफ आने वाली किसी भी वस्तु पर निगरानी की जा सके। साथ ही साथ इन खतरों से निपटने के लिए हर संभव उपायों पर भी काम किया जा रहा है। जैसे कि धरती की तरफ आने वाले ऐसे उल्का पिंडों (एस्ट्रायड) को नष्ट कर देना या उनका रास्ता बदल देना। हालांकि अगर statistical certainty (मैथमेटिकल कैलकुलेशन से किसी घटना के होने, ना होने की संभावना पता करना) यह तो तय है एक ना एक दिन धरती को ऐसे ही किसी बड़े आकार वाले एस्ट्रॉयड की टक्कर का सामना करना होगा। हो सकता है यह अगले 50 सालों में हो या फिर 100 मिलियन सालों में, पर क्या हम धरती को ऐसे किसी एस्ट्रॉयड की टक्कर से बचाने के लिए तैयार हैं। धरती को ऐसे खतरे से बचाना अपने आप में एक बहुत मेहनत वाला खतरों से भरा काम है, पर यह काम एस्ट्रोनॉट (Astronauts) करेंगे यह उम्मीद मत रखिएगा, क्योंकि यह काम रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट (Robotic Space Craft) के द्वारा किया जाएगा।

बिल्कुल उसी तरह जिस तरह Planetary billiards सिस्टम काम करता है। हम किसी भी भारी वस्तु (संभवतया विस्फोटक पदार्थ) को ले जाने के लिए स्पेस प्रोब (Space Probe, जैसे की रॉकेट या स्पेस शटल) का इस्तेमाल कर सकते हैं, या खुद स्पेस प्रोब को ही भेज सकते हैं। जो सीधा जाकर के उस एस्ट्रॉयड में टकरा जाएगा और संभवतया इससे एस्ट्रॉयड धरती की तरफ अपने रास्ते से भटक जाएगा यानी कि उसका रास्ता बदल जाएगा।

नासा और यूरोपियन स्पेस एजेंसी एक संयुक्त मिशन के अंतर्गत अगले कुछ सालों में इस टेक्नोलॉजी का ऐसा एक टेस्ट कर सकती है। इस मिशन में दो स्पेसक्राफ्ट को भेजा जाएगा। पहले का नाम है “एस्ट्रॉयड इंपैक्ट मिशन” (Asteroid Impact Mission), जिसे शॉर्ट में “aim” भी कहा जाता है। इसे 2020 के आखिर तक लांच किया जा सकता है। और दूसरे का नाम है “डबल एस्ट्रॉयड रिडायरेक्शन टेस्ट” (Double asteroid redirection test) , जिसे शॉर्ट में “Dart” भी कहा जाता है। इसे 2021 या 2022 तक लांच किया जा सकता है। यह एक डबल एस्ट्रॉयड तक पहुंचेंगे, जिनके नाम है “Demos और Did a moon”। Demos का आकार 780 मीटर का है जबकि did a moon का आकार 170 मीटर चौड़ा है। जब aim क्राफ्ट इन एस्ट्रॉयड के पास पहुंचेगा तो वह इनकी संरचना के ऊपर स्टडी करेगा यानी कि उनकी बनावट और अन्य जानकारियां जानने की कोशिश करेगा। और जब तक dart क्राफ्ट इन तक तक पहुंचेगा, वह सीधा did a moon एस्ट्रॉयड में क्रेश हो जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम को aim क्राफ्ट रिकॉर्ड करेगा और यह पता करने की कोशिश करेगा की छोटी चट्टानों पर जो विस्फोट किया गया है उसका क्या परिणाम निकलता है और अगर बड़ी साइज के एस्ट्रॉयड के ऊपर यह कोशिश की जाए तो उसके क्या परिणाम निकल सकते हैं ताकि बड़े एस्ट्रॉयड को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी से दूर भेजा जा सके क्योंकि यहां सबसे बड़ा खतरा यह है कि कहीं ऐसा ना हो कि विस्फोट करने के बाद वह बड़ा एस्ट्रॉयड और भी ज्यादा तेज गति से धरती की तरफ आने लग जाए। किसी भी एस्ट्रॉयड की दिशा धरती की तरफ से किसी और तरफ बदलने की राह में यह एक छोटा सा कदम है पर मानवता को बचाने के लिए एक बहुत बड़ी शुरुआत है।

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