डेटाबेस क्या है? – Databsae in Hindi

डेटाबेस अलग अलग तरह के डाटा का समूह या ग्रुप होता है। ये डाटा रेलवेन्ट या ईररेलेवेंट दोनों तरह का हो सकता है। आम तोर पर डेटाबेस कुछ खास तरह की इनफार्मेशन को स्टोर करने के काम में आता है। इस इनफार्मेशन को अपनी सुविधा के हिसाब से व्यवस्थित, मॉडिफाई, अपडेट या डिलीट भी कर सकते है।

रेलेवेंट डाटा: जो डाटा आपस में जुड़ा हुआ हो और किसी तरह की मीनिंगफुल इनफार्मेशन देता हो, जैसे किसी ऑफिस में काम करने वाले लोगो की इनफार्मेशन। उदहारण : नाम, डिपार्टमेंट, कांटेक्ट नंबर, एड्रेस आदि।

ईररेलेवेंट डाटा: जो डाटा एक साथ तो रखा गया हे पर किसी तरह की मीनिंगफुल इनफार्मेशन नहीं दे रहा है। जैसे ऑफिस में काम करने वाले लोगो की सैलरी का रिकॉर्ड, क्यूंकि ये सारा डाटा एक साथ तो है पर इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है।

डेटाबेस क्या है?

डेटाबेस क्या है - Databsae in Hindi

डेटाबेस कई तरह के डाटा का समूह होता है जो कुछ प्रधान विषय के बारे में व्यवस्थित सूचनाएं प्रदान करता है।

यहाँ प्रधान विषय का मतलब वो सब्जेक्ट या ऑब्जेक्ट हे जिसके लिए डेटाबेस बनाया गया गया है। जैसे की निचे दी गयी टेबल नंबर 1, जो की वाटर वर्क्स के एम्प्लाइज के बारे में इनफार्मेशन देने के लिए बनाया गया है।

एक डेटाबेस हमारे फ़ोन की कांटेक्ट लिस्ट की तरह सिंपल भी हो सकता हे और किसी ऑफिस के दस सालो क रिकॉर्ड की तरह complex भी हो सकता है।

डेटाबेस की जरुरत क्यों है?

डेटाबेस के पहले किसी भी तरह का डाटा अलग अलग फाइल्स में रखा जाता था। जैसे की अगर निचे दी गई टेबल नंबर 1 को हम फाइल्स में कन्वर्ट करते है तो ये कुछ इस तरह दिखेगी:

file heading RN

एम्प्लोयी का नाम

राजेश नायर

फाइल 1

file heading RN

एम्प्लोयी का पद

SHO

फाइल 2

file heading RN

एम्प्लोयी का विभाग

वाटरवर्क्स

फाइल 3

file heading RN

एम्प्लोयी का पता

बिहार

फाइल 4

file heading RN

एम्प्लोयी का नाम

राजेश नायर

एम्प्लोयी का पद

SHO

एम्प्लोयी का विभाग

वाटरवर्क्स

एम्प्लोयी का पता

बिहार

फाइल 5

अगर ऊपर दिए गए डायग्राम को देखे तो पाएंगे के यहाँ एक ही एम्प्लोयी की इंफॉर्मेशंस 4 अलग अलग फाइल्स (फाइल 1 , फाइल 2 , फाइल 3 , फाइल 4 ) में रखी है। अगर हमे इस एम्प्लोयी राजेश नायर की सारी जानकारी चाहिए तो हमे 4 अलग अलग फाइल्स के डाटा को सर्च करना होगा। इसमें काफी वक़्त और मेहनत बर्बाद हो जाएगी क्योकि किसी भी ऑफीस में कम से कम 100 एम्प्लोयी भी हुए तो सबकी फाइल्स मिला के तक़रीबन 400 फाइल्स हो जाएँगी और हमे हर एक फाइल में जाके देखना होगा के वो किस की फाइल है। और फिर राजेश नायर की जब सारी फाइल्स मिल जाएगी तो उसका सारा डाटा एक नई फाइल (फ़ाइल 5) में डालना होगा और फिर ये नई फाइल को हम यूज़ कर पाएंगे।

पर इस तरह स्टोरेज की कमी होती जाएगी और कुछ वक़्त के बाद पूरी स्टोरेज useless फाइल्स से भर जाएगी। यानि की टाइम, पैसा, मेहनत और स्टोरेज (भण्डारण क्षमता) सब कुछ काफी ज्यादा बेकार चला जाता है। जबकि दूसरी तरफ डेटाबेस में सारा डाटा एक टेबल के फॉर्मैट में रहता है और आपस में जुड़ा होता हे जिससे सिर्फ एक single कमांड से उस एम्प्लोयी की सारी जानकारी हमे एक बार में मिल जाएगी और इसके लिए अलग से कोई नई टेबल नहीं बनती है। उसी टेबल में एक वर्चुअल (काल्पनिक) टेबल कुछ वक़्त के लिए बन जाएगी और जैसे ही हम उस टेबल को close कर देंगे तो ये वर्चुअल टेबल खुद ही डिलीट हो जाएगी। पर मैन टेबल में रखा डाटा तब भी सेव ही रहेगा।

डेटाबेस के उपयोग

डेटाबेस का इस्तेमाल काफी बड़े लेवल के डाटा या रिकार्ड्स को सिस्टमैटिक तरह से व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है, पर अब इसकी आसान टेक्नोलॉजी और खूबियों के कारण अब ये हर छोटी से छोटी इनफार्मेशन को भी स्टोर करने के काम आता है। आज के समय में डेटाबेस के बिना किसी भी तरह की डिजिटल एप्लीकेशन या व्यवस्था नहीं चल सकती हे, क्यूंकि जो भी एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर हम कंप्यूटर या मोबाइल्स की स्क्रीन पर देखते है वो सिर्फ एक खाली खांचा (ओवरव्यू लेआउट) होता है, पर उसमे दिखने वाली सारी जानकारी उससे जुड़े डेटाबेस में से आती है।

डेटाबेस का स्ट्रक्चर या परिवेश

एक डेटाबेस को टेबल के रूप में प्रदर्शित किया जाता हे। जैसे की निचे दर्शाया गया हे।

एम्प्लोयी का नाम पद विभाग पता
राजेश नायर SHO वाटरवर्क्स बिहार
विनोद ख्याति क्लर्क वाटरवर्क्स कर्नाटक
सोफी स्टीव HR वाटरवर्क्स केरल

टेबल नम्बर 1: वाटरवर्क्स एम्प्लाइज इनफार्मेशन टेबल 

डेटाबेस टेबल में Rows और Columns होते है। Rows को टपल या रिकॉर्ड कहते है। वही कॉलम को डोमेन या एट्रिब्यूट (खूबी या विशेषता) कहते है। Rows और column से मिलकर बने एक रिकॉर्ड को cell या नोड कहते है। जैसे ऊपर दिखाई गयी टेबल में राजेश नायर एक cell है और ये उस एम्प्लोयी का नाम है जो SHO पद पर काम करता है।

जैसा की ऊपर टेबल में दिखाया गया है यहाँ चार कॉलम और चार रौ है। हर कॉलम के अंडर एक खास तरह के डाटा या इनफार्मेशन ही आ सकते हे जैसे के पहले कॉलम में सिर्फ एम्प्लोयी का नाम, दूसरे कॉलम में एम्प्लाइज की पोस्ट, तीसरे कॉलम में एम्प्लाइज का डिपार्टमेंट और चौथे कॉलम में एम्प्लाइज का पता ही आ सकता है। अगर इन कॉलम में कुछ और डाटा भर दिया जाये तो वो सही इनफार्मेशन नहीं दे पायेगा।  जैसे की निचे दी गयी टेबल में बताया गया है।

एम्प्लोयी का नाम पद विभाग पता
राजेश नायर SHO वाटरवर्क्स बिहार
वाटरवर्क्स विनोद ख्याति क्लर्क कर्नाटक
वाटरवर्क्स केरल सोफी स्टीव HR

टेबल नंबर 2: वाटरवर्क्स एम्प्लाइज इनफार्मेशन टेबल गलत कॉलम व्यवस्था के साथ 

यहाँ इस टेबल में एम्प्लाइज के नाम के कॉलम में एम्प्लोये का नाम दूसरी और तीसरी रौ में गलत दिया गया है। उनके नाम की जगह उनके डिपार्टमेंट का नाम दिया गया है। और पद की जगह नाम और पता दिया गया है। विभाग में पोस्ट और नाम दिया गया है, और पता में पोस्ट दिया गया है। तो हम सीधे सब्दो में या कह सकते है  के ये टेबल अब सही इनफार्मेशन नहीं दे रही है।

इसी तरह अगर रौ की बात करे तो एक रौ सिर्फ एक एम्प्लोयी के बारे में ही इनफार्मेशन दे सकती है। तो अगर हम इन rows को मिक्स करदे तो भी टेबल की इनफार्मेशन गलत हो जाएगी। उदहारण के तोर पर इसी टेबल को देखते है।

एम्प्लोयी का नाम पद विभाग पता
राजेश नायर क्लर्क वाटरवर्क्स केरल
सोफी स्टीव SHO वाटरवर्क्स बिहार
विनोद ख्याति HR वाटरवर्क्स कर्नाटक

टेबल नंबर 3: वाटरवर्क्स एम्प्लाइज इनफार्मेशन टेबल गलत रौ इनफार्मेशन के साथ 

अब इस टेबल में राजेश नायर का नाम और विभाग तो सही है पर पोस्ट और पता गलत है। यही सब विनोद ख्याति और सोफी स्टीव के साथ भी हुआ है। यानि के टेबल अब सही इनफार्मेशन नहीं दे पा रही है।

अगर हम इन तीनो टेबल्स को देखे तो सिर्फ टेबल नंबर 1 ही बिलकुल सही इनफार्मेशन दे रही है। यही टेबल रेलेवेंट डेटाबेस कहलाती है।

पर टेबल नंबर 2 व 3 गलत इनफार्मेशन दे रही है, इसलिए ये इर्रेलेवेंट डेटाबेस कहलाती है।

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (DBMS)

डेटाबेस को बनाने और मैनेज करने के लिए जिस एप्लीकेशन या सिस्टम का उपयोग किया जाता है, उसे ही डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम कहते हे जैसे की SQL (Structured Query Language), IBM-DB2, ORACLE.

MS-Office में मौजूद MS-Excel भी डेटाबेस की तरह इस्तेमाल होता है पर य सिर्फ डेटाबेस नहीं है , इसमें कई और भी खुबिया है।

डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम में डाटा के साथ कुछ खास तरह के कंप्यूटर प्रोग्राम यानि के ऍप्लिकेशन्स होती है जोकि उस डेटाबेस को कण्ट्रोल करने के काम में आती है।

डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (DBA)

वो व्यक्ति या संस्था जो डेटाबेस को कण्ट्रोल करती है वो ही डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर कहलाता है।

नोट: डेटाबेस, डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम बनाने तथा डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर बनने के लिए ट्रेनिंग जरूरी है जोकि अलग अलग तरह की संस्थाओ के द्वारा दी जाती है।

डेटाबेस मॉडल्स

अलग अलग तरह की मांग के हिसाब से अलग अलग स्ट्रक्चर वाले डेटाबेस डिज़ाइन बनते है पर इन्हे चार मैन मॉडल्स में बाटा जा सकता है:

Hierarchical Database Model

Hierarchical Database Model

Image Source

इसमें डेटाबेस एक tree या पेड़ की तरह दीखता है। इस मॉडल में मैन सब्जेक्ट को या डेटाबेस सब्जेक्ट को tree की root की जगह रखा जाता हे और बाकि सारी जानकारी को tree की टहनियों की तरह जमा दिया जाता है।

Network Database Model

Network Database Model

Image Source

इस स्ट्रक्चर या व्यवस्था में डेटाबेस के सरे सेल को एक दुसरे से इस तरह से जोड़ दिया जाता है के वो दिखने में बहुत ही ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड लगता है पर इस डिज़ाइन में cells एक दुसरे से जुड़कर कम समय में ज्यादा और सही इनफार्मेशन देती है। डिजिटल मीडिया में सबसे ज्यादा काम आने वाला डेटाबेस मॉडल यही है।

Object-Oriented Database Model

Object-Oriented Database Model

Image Source

इस मॉडल मे सब्जेक्ट से जुड़े बाकि सारे ऐट्रिब्यूट्स को सब सब्जेक्ट या छोटे छोटे ऑब्जेक्ट्स में बदल दिया जाता है, फिर उन ऑब्जेक्ट्स को अलग अलग तरह की टेबल में मैन सब्जेक्ट्स बना दिया जाता है।

आसान सब्दो में कहे तो ज्यादा मुश्किल सब्जेक्ट्स को छोटे छोटे भागो में बाट दिया जाता है तथा हर छोटा भाग अपनी पूरी इन्फोर्मशनैनी खुद की बनाई हुई टेबल्स में रखता है।

ये सारे ऑब्जेक्ट आपस में जुड़े रहते है। इसमें आप खाली वही इनफार्मेशन देखते हे जो आप चाहते है बाकि की सारी इनफार्मेशन hide रहती है। जेसे की इंटरनेट सर्फिंग करते वक़्त हम सिर्फ वही डाटा देख पते हे जिस पर क्लिक करते है बाकि की सारी इनफार्मेशन hide रहती है।

Relational Model

Relational Model

Image Source

ये डेटाबेस का सबसे आसान या सिंपल मॉडल है, इसी वजह से ये सबसे ज्यादा प्रचलित है। इसमें भी टेबल्स ही बनती है पर इन टेबल्स के अंदर रौ और कॉलम के कॉम्बिनेशन से बनने वाले cell को key कहा जाता है।

इस डेटाबेस की टेबल्स में मौजूद डाटा आपस में किसी रिलेशन से जुड़ा होता है।

डेटाबेस के Components

इसका मतलब के एक डेटाबेस बनाने के लिए हमे क्या क्या चीज़े चाहिए। एक अच्छा डेटाबेस बनाने के लिए हमे खास तोर से ये 4 चीज़े चाहिए:

डाटा: किस तरह के डाटा या इनफार्मेशन बनाना है। उसी हिसाब से डेटाबेस का डिज़ाइन सेलेक्ट किया जाता है।

हार्डवेयर: डेटाबेस एक तरह की कंप्यूटर एप्लीकेशन या सॉफ्टवेयर है पर ये चलेगा तो किसी हार्डवेयर डिवाइस पर ही। लेकिन उस हार्डवेयर का configuration इतना capacity वाला होना चाहिए की उस डेटाबेस की एप्लीकेशन को सपोर्ट कर सके। बिलकुल वैसे ही जैसे की अलग अलग मोबाइल apps एंड्राइड के अलग अलग version पर चलती है।

सॉफ्टवेयर: डेटाबेस को बनाने के लिए किस तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना है जैसे कि SQL, IBM-DB2, Oracle. ये सॉफ्टवेयर कस्टमर की डिमांड के हिसाब से डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर सेलेक्ट करता है।

Users: वो सारे लोग या संस्थाए (agencies) जो डेटाबेस को बनाते है या सिर्फ इस्तेमाल करते है, डेटाबेस यूज़र्स कहलाते है। जैसे की ऑनलाइन शॉपिंग वाले अपनी वेबसाइट पे अपने प्रोडक्ट्स के बारे में जानकारी डालते है, जोकि एक तरह का डेटाबेस ही है। जबकि कस्टमर उस डेटाबेस को सिर्फ इस्तेमाल करता है। और उस डेटाबेस को बनाता डेटाबेस creator है, और कंट्रोल डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर करता है। यह सब डेटाबेस users कहलाते है।

अगर आपके दिमाग में डेटाबेस क्या है इस बारे में कोई सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *